रतलाम। स्टेडियम मार्केट के सामने वर्षों से लग रही खानपान की चौपाटी को हटाने की नगर निगम की कार्रवाई के बाद अब मामला राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। बुधवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम का घेराव कर प्रदर्शन किया और चौपाटी के दुकानदारों के समर्थन में ज्ञापन सौंपने पहुंचे।

हालांकि, प्रदर्शन के दौरान दुकानदारों के बीच ही दो गुट नजर आए और अधिकांश दुकानदारों ने कांग्रेस का झंडा लाए जाने का विरोध करते हुए कांग्रेस के साथ ज्ञापन देने से दूरी बना ली।
दुकानदारों का कहना था कि उनकी समस्या रोजगार और दुकान हटाए जाने से जुड़ी है और इसमें किसी राजनीतिक दल का बैनर या झंडा नहीं होना चाहिए। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने कुछ दुकानदारों के साथ ज्ञापन सौंपा, जबकि कांग्रेस के झंडे का विरोध करने वाले दुकानदारों ने अलग से नगर निगम पहुंचकर अपना ज्ञापन दिया।

दरअसल, मंगलवार को नगर निगम का भारी अमला तीन जेसीबी मशीनों के साथ स्टेडियम मार्केट के सामने पहुंचा था। यहां लंबे समय से संचालित करीब 50 से अधिक ठेला एवं दुकान संचालकों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने जोरदार विरोध किया। एक दुकानदार जेसीबी के सामने लेट गया, जबकि कुछ लोगों ने जेसीबी पर चढ़ने का प्रयास भी किया। विरोध बढ़ने के बाद कार्रवाई रोकनी पड़ी।
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मौके पर कांग्रेस नेत्री यास्मीन शेरानी और मयंक जाट सहित अन्य कांग्रेस नेता भी पहुंचे और दुकानदारों के समर्थन में कार्रवाई का विरोध किया। इस दौरान निगम अधिकारियों, कांग्रेस नेताओं और दुकानदारों के बीच काफी देर तक बहस और विरोध का दौर चलता रहा।
दुकानदारों का कहना है कि निगम द्वारा बताए जा रहे एमपी-43 मार्केट में 22 से 23 लाख रुपये की दुकानें उनके लिए बेहद महंगी हैं। उनका कहना है कि वर्षों से चल रही दुकानों के कारण उनका परिवार चल रहा है, इसलिए उन्हें ऐसा वैकल्पिक स्थान दिया जाए जहां वे कम लागत में अपना रोजगार जारी रख सकें।
बाद में दुकानदार नगर निगम कार्यालय पहुंचे और महापौर प्रहलाद पटेल से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। महापौर ने दुकानदारों के लिए तीन वैकल्पिक स्थान चिन्हित करने की बात कही।
प्रदर्शन में कांग्रेस के झंडे का विरोध बना चर्चा का विषय

बुधवार के प्रदर्शन में सबसे ज्यादा चर्चा दुकानदारों द्वारा कांग्रेस के झंडे का विरोध किए जाने की रही। दुकानदारों के एक बड़े वर्ग ने स्पष्ट किया कि वे अपनी समस्या को राजनीतिक मंच नहीं बनाना चाहते। इसी वजह से कुछ दुकानदार कांग्रेस के साथ ज्ञापन देने के बजाय अलग से नगर निगम पहुंचे।

इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विरोधियों का कहना है कि नगर निगम की कार्रवाई मंगलवार को शुरू हुई और बुधवार को प्रदर्शन किया गया। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह दुकानदारों के रोजगार और उनके अधिकारों के समर्थन में खड़ी है।
पीएम आवास मल्टी मामले की भी उठी चर्चा।
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शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा की राजनीतिक सक्रियता को लेकर उनके विरोधी एक बार फिर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले पीएम आवास मल्टी के मामले में भी विपक्षी राजनीतिक आरोप लगे थे कि कार्रवाई के कई दिन बाद कांग्रेस ने मुद्दे को लेकर सक्रियता दिखाई।

अब चौपाटी मामले में भी इसी तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं कि कार्रवाई शुरू होने के बाद राजनीतिक विरोध क्यों तेज हुआ। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इसे दुकानदारों के समर्थन में लोकतांत्रिक विरोध बताया जा रहा है।
फिलहाल चौपाटी हटाने की नगर निगम की कार्रवाई, दुकानदारों का विरोध, कांग्रेस का प्रदर्शन और दुकानदारों का कांग्रेस के झंडे से दूरी बनाना—इन सभी घटनाक्रमों ने रतलाम की स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहर के विकास और सौंदर्यीकरण के साथ वर्षों से अपना रोजगार चला रहे छोटे दुकानदारों के भविष्य का समाधान कैसे निकलेगा?
Author: Naradh News24
प्रधान संपादक


