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15 दिनों में आस्था के 11 बड़े पड़ाव, 14 सितंबर को तीज और गणेश चतुर्थी का महासंयोग”

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भादौ में आस्था का महापर्व: जन्माष्टमी से पितृपक्ष तक 15 दिन धर्म-संस्कृति के नाम
जन्माष्टमी से पितृपक्ष तक धार्मिक आयोजनों की धूम, 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का विशेष संयोग
नारद न्यूज़ 24 | विशेष रिपोर्ट
रतलाम। भाद्रपद यानी भादौ का महीना भारतीय सनातन परंपरा में श्रद्धा, भक्ति, संयम और धार्मिक आस्था का विशेष काल माना जाता है। इस बार सितंबर 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से लेकर गणेशोत्सव, हरतालिका तीज, राधाष्टमी, अनंत चतुर्दशी और पितृपक्ष तक धार्मिक पर्वों की लंबी श्रृंखला देखने को मिलेगी। देखिए पूरी रिपोर्ट 👇👇

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इस दौरान घर-घर पूजा-अर्चना, व्रत-उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंदिरों में विशेष श्रृंगार, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होंगे। खास बात यह है कि 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही हैं। इससे एक ओर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव-पार्वती की आराधना करेंगी, वहीं दूसरी ओर गणपति बप्पा की स्थापना के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा।

4 सितंबर से शुरू होगा पर्वों का सिलसिला
धार्मिक उत्सवों की शुरुआत 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से होगी। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर व्रत रखेंगे और मध्यरात्रि में नंदलाल के जन्म के समय पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों में आकर्षक झांकियां, बाल गोपाल का श्रृंगार, भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव के आयोजन होंगे। 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी।

इसके बाद 7 सितंबर को अजा एकादशी, 8 सितंबर को प्रदोष व्रत और 9 सितंबर को मासिक शिवरात्रि जैसे धार्मिक अवसर आएंगे। यानी जन्माष्टमी के बाद भी लगातार धार्मिक आस्था का वातावरण बना रहेगा।
14 सितंबर को दो बड़े पर्व, गणेशोत्सव का आगाज
सितंबर का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक दिन 14 सितंबर रहेगा। इस दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व मनाए जाएंगे। पंचांगों में भी दोनों पर्व इसी तिथि पर दर्ज हैं।

हरतालिका तीज पर महिलाएं पारंपरिक रूप से व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं तथा परिवार के सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करती हैं।

इसी दिन गणेश चतुर्थी पर घरों, मोहल्लों और सार्वजनिक पंडालों में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना होगी।

इसके साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों से वातावरण भक्तिमय होने की संभावना है।
राधा अष्टमी पर राधा-कृष्ण भक्ति की छटा

19 सितंबर को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। राधा-कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा, श्रृंगार, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होंगे। श्रद्धालु राधारानी की आराधना कर प्रेम, भक्ति और पारिवारिक सुख की कामना करेंगे।

22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रहेगा। एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना और संयम-साधना से जोड़कर देखा जाता है।
25 सितंबर को गणपति को विदाई।
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दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ होगा। इस दिन कई स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए चल समारोह निकाले जाएंगे। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच श्रद्धालु गणपति बप्पा को विदाई देंगे और अगले वर्ष पुनः पधारने की प्रार्थना करेंगे।
2026 के पंचांग में 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ गणेश विसर्जन दर्ज है।
27 सितंबर से पूर्वजों के स्मरण का पितृपक्ष
भाद्रपद के धार्मिक क्रम का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 27 सितंबर से शुरू होने वाला पितृपक्ष है। इस अवधि में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए तर्पण, श्राद्ध और अन्य पारंपरिक कर्म करते हैं।

पितृपक्ष भारतीय संस्कृति में केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मरण और पारिवारिक संस्कारों को आगे बढ़ाने की परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है। 2026 में पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।
15 दिनों में आस्था के प्रमुख पड़ाव।

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4 सितंबर — श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
7 सितंबर — अजा एकादशी
8 सितंबर — प्रदोष व्रत
9 सितंबर — मासिक शिवरात्रि
14 सितंबर — हरतालिका तीज एवं गणेश चतुर्थी
15 सितंबर — ऋषि पंचमी
17 सितंबर — विश्वकर्मा पूजा
19 सितंबर — राधा अष्टमी
22 सितंबर — परिवर्तिनी एकादशी
25 सितंबर — अनंत चतुर्दशी एवं गणेश विसर्जन
26 सितंबर — भाद्रपद पूर्णिमा
27 सितंबर — पितृपक्ष आरंभ एवं प्रतिपदा श्राद्ध

आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक रंग

भादौ के इन पर्वों का महत्व केवल पूजा और व्रत तक सीमित नहीं है। भारतीय परंपरा में ये अवसर परिवार को एक साथ जोड़ने, बच्चों को अपनी संस्कृति और संस्कारों से परिचित कराने, मंदिरों और धार्मिक स्थलों से जुड़ने तथा समाज में आपसी सद्भाव बढ़ाने का माध्यम भी बनते हैं।

जन्माष्टमी में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण, हरतालिका तीज में शिव-पार्वती की आराधना, गणेशोत्सव में मंगल और बुद्धि के देवता भगवान गणेश की उपासना, राधाष्टमी में राधा-कृष्ण भक्ति और पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण—इन सभी परंपराओं में भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण संदेश दिखाई देता है। खबरों को देखने के लिए 👇👇

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आने वाला सितंबर श्रद्धा, भक्ति, उत्सव और संस्कारों का ऐसा संगम लेकर आ रहा है, जिसमें घरों से लेकर मंदिरों और सार्वजनिक आयोजन स्थलों तक धार्मिक आस्था की अलग-अलग छटाएं देखने को मिलेंगी।
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