निखर गई सूर्यकुण्ड की आभा 14 करोड़ की लगी लागत।

♦इस खबर को आगे शेयर जरूर करें ♦

👇 लिसन न्यूज़

उत्तर प्रदेश अयोध्या मे लगा मेला  चमक रही नव्य सूर्य कुण्ड की दिव्य आभा

अयोध्या के सूर्य कुंड की क्या है कहानी, किसने की थी यहां के सूर्य मंदिर की स्थापना अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir 2024) में प्राण प्रतिष्ठा  के बाद प्रत्येक हिंदू धर्म की आस्था के बढ़ते कदम भगवान श्री राम की जन्मस्थली के चारो और छोटे बड़े पौराणिक चरित्र निर्माण में प्रत्येक मंदिर परिसर और हर एक स्थान की गरिमा और मर्यादा की महत्ता में  काफ़ी वृद्धि हुई है।

. धार्मिक नगरी अयोध्या में तमाम दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थल हैं. इन्हीं में सूर्य कुंड और सूर्य मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है.

नारद न्यूज़ 24 प्रधान संपादक  दौलतराम पाटीदार अयोध्या दर्शन छुपे रहस्य को उजागर करने का अवसर मिला तार्यतम मे जानिए सूर्य कुंड और सूर्य मंदिर से जुड़ कुछ अनछुए और अनकहे तथ्य.

सूर्यकुंड संरक्षक पंडित सत्यदेव मिश्रा एवं ट्रस्ट अध्यक्ष अविनाश तिवारी ने बताया कि नव्य पूर्ण सूर्य कुंड मंदिर के दिव्य सौंदर्य करण के बाद सूर्य कुंड महा रविवार को बड़ा मेला लगा है जहां सूर्यकुंड 8.5 एकड़ में फैले हुए परिसर का सुंदरीकरण कराया गया करीब चार एकड़ के लंबे चौड़े सूर्यकुंड की सफाई जल की स्वच्छता के साथ नहीं सीढ़ियां बनाई गई है।

इसके साथ सूर्य मंदिर को पूर्ण जीर्णोद्धार सहित कुंड के साथ परिधि में 25 सूर्य स्तंभ बनाए गए हैं जो जटिल नक्काशीदार हैं इस सूर्यकुंड में फवारा लगाया गया है जो भगवान शंकर के मंदिर को सुंदरता प्रदान करता है।

 

अयोध्या के सूर्य कुंड की क्या है कहानी, किसने की थी यहां के सूर्य मंदिर की स्थापना.।

अयोध्या ले लगभग चार किलोमीटर की दूर दर्शन नगर में चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित सूर्य कुंड और सूर्य मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. माना जाता है कि इस कुंड का निर्माण अयोध्या के सूर्यवंशी शासकों ने किया था. इस कुंड के साथ ही भगवान सूर्य का एक मंदिर भी है जो सूर्यवंशियों के लिए सूर्य देव की आस्था का प्रतीक माना जाता है. सरकार ने 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले इस पौराणिक कुंड और मंदिर का जीर्णोद्धार 14 करोड़ की लागत से कराया है. वेदों में भगवान सूर्य को जड़-चेचन जगत की आत्मा कहा गया है. सूर्यवंशी राजा घोष का कुष्ठरोग इस कुंड में स्नान करने से ठीक हुआ था. मान्यता है कि इस सूर्य कुंड में स्नान और सूर्य मंदिर में दर्शन-पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.https://www.youtube.com/@naradhnews2424

 

अयोध्या का सूर्य मंदिर.आराध्य देव के दर्शनों के लिए सूर्य मंदिर और कुंड का निर्माण कराया था.ऐसे पड़ा तीर्थ का नाम घोषार्क : एक कथा यह भी है कि सूर्य मंदिर और कुंड के जीर्णोद्धार से पूर्व इस स्थान को ‘घोषार्क तीर्थ’ के नाम से भी जाना जाता था. इतिहासकारों ने अपनी पुस्तकों में भी इसका जिक्र किया है. साथ ही इस तीर्थ का वर्णन स्कंद पुराण में भी मिलता है.  जिसके बाद राजा ने वहां सूर्यदेव की आराधना प्रारंभ की. जिसके बाद सूर्य देव ने उन्हें दर्शन दिए. जिसके बाद राजा ने सूर्य मंदिर का निर्माण कराया. उसी समय से इस तीर्थ का नाम घोषार्क पड़ गया, जिसे बाद में सूर्य कुंड और सूर्य मंदिर के नाम से पहचाना जाने लगा.श्रीराम के राज्याभिषेक में आए थे सूर्य देव : प्रतिदिन शाम के समय इस कुंड में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन भी किया जाता है.û जिसमें सूर्यवंश की महिमा और सूर्य मंदिर के इतिहास के विषय में बताया जाता है. उम्मीद की जा रही है कि जो राम भक्त अयोध्या श्री राम के दर्शनों के लिए आएंगे, वह इस पौराणिक सूर्यकुंड के दर्शन भी करने आएंगे.।https://www.facebook.com/dolat.patidar

सरकार चाहती है कि अयोध्या में धार्मिक पर्यटन बढ़े और यहां आने वाले श्रद्धालु कम से कम दो-तीन दिन रुक कर पौराणिक स्थलों के दर्शन भी करें. इससे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी. जिससे क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी. यह भी कहा जाता है कि जब श्रीराम का राज्याभिषेक हो रहा था, तब सभी सभी देवी-देवता अयोध्या आए थे.

इनमें सूर्य देव भी शामिल थे. वह इसी स्थान पर रुके थे, जिसे आज सूर्य कुंड के नाम से जाना जाता है. यह सुबह आठ बजे से रात 10 बजे तक यह स्थान दर्शनार्थियों के लिए खुला रहता है श्री सीताराम भक्तमाल आश्रम सहित अन्य दार्शनिक स्थल अयोध्या मन्दिर।

Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram
LinkedIn
Email
Print

Leave a Comment

Live cricket updates

Radio

Stock Market Updates

Weather




error: Content is protected !!