धार भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर घोषित किया, 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से रद्द ।

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धार भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर घोषित किया, 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से रद्द ।

इंदौर/धार, 15 मई 2026 – मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ (न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच) ने धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर पर लंबे समय से चले आ रहे मामले में आज बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को राजा भोज द्वारा 1034 ई. के आसपास स्थापित हिंदू मंदिर (वाग्देवी/सरस्वती मंदिर और प्राचीन संस्कृत विद्यापीठ) माना है।13072a3ed8d4

मुख्य फैसले के हाइलाइट्स:

2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से रद्द: शुक्रवार को नमाज की अनुमति देने वाले आदेश को खारिज कर दिया गया।

हिंदू पक्ष को परिसर में पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया गया।

परिसर को राजा भोज की संपत्ति/हिंदू धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता।

मुस्लिम पक्ष की मांगों पर विचार करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था (नजदीकी जगह) की संभावना का उल्लेख।

दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील।78 b 772

यह फैसला ASI की 2024 की 98 दिनों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें परिसर में पूर्व-मौजूद मंदिर अवशेष, मूर्ति खंड, स्तंभ, शिलालेख और परमार काल (9वीं-13वीं शताब्दी) के सबूत मिले थे। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मौजूदा संरचना में प्राचीन मंदिर के हिस्सों का पुन: उपयोग किया गया।5b0d75

पृष्ठभूमि और पूरी जानकारी:👇👇

https://www.youtube.com/@naradhnews2424

 

भोजशाला 11वीं शताब्दी का ASI-संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। 2003 में ASI ने मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की अनुमति दी थी।

2024: हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने 98 दिन का सर्वे किया (22 मार्च से शुरू)। रिपोर्ट जुलाई 2024 में कोर्ट में जमा हुई।

जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी पर दोनों समुदायों को अलग-अलग समय/स्थान पर पूजा-नमाज की अनुमति दी।

अप्रैल-मई 2026: इंदौर बेंच में रोजाना सुनवाई (करीब 36-43 घंटे बहस), 12 मई को फैसला सुरक्षित।

15 मई 2026: ऐतिहासिक फैसला। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे स्वागत योग्य बताया।97402fb709bb

प्रतिक्रियाएं: हिंदू संगठन इसे न्याय की जीत बता रहे हैं। मुस्लिम पक्ष संभवतः सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। धार में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दोनों पक्षों ने शांति की अपील की है।✍️✍️👇👇

https://chat.whatsapp.com/DrVjtNFaGwPEhayU8Wc381?mode=gi_t

यह फैसला Places of Worship Act के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, हालांकि कोर्ट ने ऐतिहासिक/पुरातात्विक सबूतों

को प्राथमिकता दी।

Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

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