जनसुनवाई के दिन कलेक्टर कार्यालय का सभा कक्ष रहा खाली, अब सवाल—फरियादियों की शिकायतों का निराकरण कहां और कैसे?

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कलेक्टर न्यायालय में नियमित सुनवाई के निर्देश, लेकिन जनसुनवाई के दिन कलेक्टर कार्यालय का सभा कक्ष रहा खाली

फरियादियों की संख्या नहीं दिखी, सवाल—शिकायतों का निराकरण संबंधित कार्यालयों में कैसे और कितनी पारदर्शिता से होगा?

रतलाम। कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया द्वारा कलेक्टर न्यायालय में लंबित प्रकरणों की नियमित एवं समयबद्ध सुनवाई के निर्देश दिए जाने के बाद अब आम लोगों की शिकायतों और लंबित मामलों के प्रभावी निराकरण को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। कलेक्टर ने पुराने एवं लंबे समय से लंबित राजस्व, खनिज, फौजदारी तथा अन्य वैधानिक प्रकरणों को प्राथमिकता से सूचीबद्ध कर सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इसी बीच मंगलवार को जनसुनवाई के निर्धारित दिन कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष में फरियादियों की मौजूदगी नजर नहीं आई। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिन नागरिकों की समस्याएं लेकर वे जनसुनवाई तक पहुंचते हैं, उनके आवेदन अब किस स्तर पर स्वीकार किए जा रहे हैं और उनका निराकरण किस अधिकारी अथवा संबंधित कार्यालय द्वारा किया जा रहा है।

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विकेंद्रीकृत जनसुनवाई व्यवस्था भी महत्वपूर्ण

प्रशासन द्वारा जनसुनवाई को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से संबंधित विभागों एवं कार्यालयों के स्तर पर भी शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। ऐसे में कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष में फरियादियों की अनुपस्थिति को सीधे तौर पर यह नहीं माना जा सकता कि जिले में जनसुनवाई नहीं हो रही है। वास्तविक स्थिति यह है कि नागरिकों की शिकायतें अब संबंधित कार्यालयों तक पहुंचाकर उनका निराकरण सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

हालांकि जनहित में यह आवश्यक है कि ऐसे आवेदनों की प्राप्ति, संबंधित अधिकारी को भेजे जाने, सुनवाई की स्थिति और अंतिम निराकरण की जानकारी भी पारदर्शी रूप से उपलब्ध हो, ताकि शिकायतकर्ता को यह पता रहे कि उसके आवेदन पर कार्रवाई किस स्तर पर पहुंची है।

कलेक्टर न्यायालय के निर्देश से बढ़ी उम्मीद

कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने कलेक्टर न्यायालय के लंबित प्रकरणों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। रीडर एवं संबंधित कर्मचारियों को पुराने मामलों की अद्यतन सूची तैयार करने, नियमित कॉज लिस्ट बनाने और प्रत्येक प्रकरण की नियत तिथि पर सुनवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

साथ ही अनावश्यक स्थगन से बचने, प्रत्येक पेशी पर प्रभावी कार्रवाई करने तथा पक्षकारों को बार-बार न्यायालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ें, इसका भी विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

अब बड़ा सवाल—फरियादियों को मिलेगा समयबद्ध समाधान?

आम जनता की दृष्टि से अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों और कलेक्टर न्यायालय में लंबित प्रकरणों का निराकरण कितनी तेजी से होता है। संबंधित कार्यालयों में भेजे गए आवेदनों की निगरानी, समय-सीमा में कार्रवाई और शिकायतकर्ता को परिणाम की जानकारी मिलने की व्यवस्था प्रभावी रहती है तो विकेंद्रीकृत जनसुनवाई वास्तव में आम नागरिकों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।

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नारद न्यूज़24 का जनहित में सवाल: प्रशासन यदि शिकायतों को संबंधित कार्यालयों में निराकरण के लिए भेजता है, तो क्या प्रत्येक आवेदन की ट्रैकिंग और उसके अंतिम निराकरण की जानकारी भी शिकायतकर्ता को आसानी से उपलब्ध कराई जाएगी? यही व्यवस्था जनसुनवाई को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना सकती है।

Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

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