रतलाम में यूरिया संकट: कागज़ों में भरपूर, ज़मीन पर भूखा किसान

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👇 लिसन न्यूज़

जिले में रबी सीजन के बीच यूरिया खाद का गंभीर संकट किसानों की कमर तोड़ रहा है। हालात यह हैं कि एक बोरी खाद के लिए किसान कई-कई चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड में देर रात से लाइन में लगने के बावजूद किसानों को सिर्फ एक या दो बोरी यूरिया देकर रवाना किया जा रहा है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।

अतिक्रमण पर बवाल 👇👇

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सोमवार को शहर के महू रोड स्थित कृषि मंडी के खाद वितरण केंद्र पर यह आक्रोश फूट पड़ा। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं मिलने और टोकन व्यवस्था में धांधली के आरोप लगाते हुए किसानों ने धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी।

 

स्थिति उस वक्त और बिगड़ गई जब हंगामा बढ़ता देख खाद वितरण कर रहा सेल्समैन बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी को सूचना दिए दुकान का शटर गिराकर मौके से चला गया। इससे किसानों का गुस्सा और भड़क उठा।

 

दरअसल, रबी की बुवाई और खाद देने का समय चल रहा है। किसान सुबह से शाम तक इसी चिंता में डूबे हैं कि गेहूं और अन्य फसलों के लिए खाद की व्यवस्था कैसे हो। यदि समय पर यूरिया नहीं डाली गई तो फसल खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।

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एक ओर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी जिले में पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत यह है कि किसान 15 से 30 किलोमीटर दूर से आकर भी खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कई किसानों को नगद में खाद खरीदनी पड़ रही है।

खाद की लाइनों में बुजुर्ग महिला और पुरुष भी दिखाई दे रहे हैं, जो कई-कई घंटे धूप और ठंड में खड़े रहकर सिर्फ एक बोरी खाद पाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि जिनके पास 5 बीघा से लेकर 15–20 बीघा तक जमीन है, उन्हें भी सिर्फ एक या दो बोरी दी जा रही है, जबकि कई वीआईपी और प्रभावशाली लोगों को बिना लाइन में लगे खाद दिया जा रहा है। टोकन लिस्ट सीमित बनाई जा रही है और निजी लाभ पहुंचाने के आरोप भी किसानों ने लगाए।

करीब एक घंटे बाद मौके पर कृषि अधिकारी नीलम चौहान पहुंचीं और किसानों से चर्चा की। किसानों ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में खाद वितरण शुरू किया जाए ताकि शहर की मंडियों पर दबाव कम हो।

कृषि अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि यूरिया का एक और रैक आने वाला है, व्यवस्था बनाई जा रही है और सभी किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही किसानों से जल्दबाजी न करने की अपील की गई।

लेकिन सवाल यह है कि

👉 जो सही बताया जा रहा है, वो हकीकत क्यों नहीं बन पा रहा?

👉 कागज़ों में भरपूर खाद, फिर किसान लाइन में क्यों?

नारद न्यूज़ 24 इस सवाल को उठाता रहेगा।

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