बहुचर्चित बिरमावल सड़क विवाद में सहकारी बैंक का दावा निरस्त
न्यायालय का फैसला — पंचायत ने नियमानुसार शासकीय भूमि पर बनवाई सड़क
तत्कालीन विधायक मथुरालाल डामर के हस्तक्षेप से पहले सुलझा था मामला, ग्रामीण ने किया था अनशन

रतलाम, 29 अक्टूबर। जिले के बहुचर्चित ग्राम बिरमावल में सड़क निर्माण को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और शासन के बीच चला कानूनी विवाद अब महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा है। तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड अतुल यादव के न्यायालय ने सड़क निर्माण के विरुद्ध बैंक द्वारा प्रस्तुत दावा निरस्त कर दिया। मामले में न्यायालय ने माना कि ग्राम पंचायत बिरमावल ने शासन की पंच परमेश्वर योजना के अंतर्गत नियमानुसार शासकीय भूमि पर सड़क का निर्माण कराया था और बैंक की भूमि पर सड़क बनाए जाने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं हुआ।

अनशन से लेकर न्यायालय तक पहुंचा था मामला
वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत बिरमावल द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा था। इस दौरान जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने निर्माण कार्य रुकवाने के लिए मध्य प्रदेश शासन एवं ग्राम पंचायत बिरमावल के विरुद्ध न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया था। सड़क निर्माण जारी रखने की मांग को लेकर ग्रामीण पूनमचंद ने भूख हड़ताल भी की थी। उस समय तत्कालीन विधायक मथुरालाल डामर के हस्तक्षेप से मामला सुलझा था। हालांकि, बैंक की ओर से न्यायालय में कानूनी कार्रवाई जारी रखी गई।
बैंक ने भूमि और निर्माण को लेकर जताई थी आपत्ति

प्रकरण में ग्राम बिरमावल स्थित बैंक की सर्वे नंबर 784/3, रकबा 0.120 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख किया गया। बैंक की ओर से आरोप लगाया गया था कि पंचायत बबूल, आम और पीपल के पेड़ों को काटकर तथा बैंक की जमीन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाकर उसे बेचने की तैयारी कर रही है। इसी आधार पर पंचायत को निर्माण कार्य से रोकने की मांग की गई थी।👇👇https://youtube.com/@mpnationalnews24
शासन की ओर से क्या रखा गया पक्ष?
मध्य प्रदेश शासन की ओर से न्यायालय में जवाब प्रस्तुत कर बताया गया कि सड़क का निर्माण बैंक की भूमि पर नहीं, बल्कि शासकीय भूमि पर किया जा रहा है। ग्रामीणों को आवागमन में हो रही असुविधा दूर करने के उद्देश्य से पंच परमेश्वर योजना के तहत सीमेंट-कंक्रीट सड़क का निर्माण कराया गया था।

बैंक के प्रतिनिधियों के बयानों से सामने आई अहम बात
प्रकरण की सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से प्रबंधक शैलेश खरे एवं भूपेंद्र वर्मा ने बयान दिए। उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, उन्होंने स्वीकार किया कि बैंक की भूमि का सीमांकन नहीं कराया गया था और न्यायालय में नक्शा भी प्रस्तुत नहीं किया गया। बैंक की भूमि के कितने हिस्से पर सड़क बनी है, यह भी प्रमाणित नहीं हो सका। ग्रुप में शामिल हो कर देखिए रोज ताजा ख़बर 🫰👎👎https://chat.whatsapp.com/DrVjtNFaGwPEhayU8Wc381?s=cl&p=a&mlu=4
प्रकरण में यह भी बताया गया कि तत्कालीन विधायक मथुरालाल डामर और बैंक के प्रतिनिधि हीरालाल चौधरी मौके पर पहुंचे थे तथा सहमति के आधार पर शासकीय भूमि पर सड़क निर्माण किया गया था।
न्यायालय ने क्या माना?

न्यायालय ने माना कि ग्राम पंचायत बिरमावल ने पंच परमेश्वर योजना के अंतर्गत ठहराव प्रस्ताव पारित कर नियमानुसार सड़क का निर्माण कराया था। बैंक की भूमि पर सड़क निर्माण किए जाने का प्रमाण नहीं मिलने के आधार पर बैंक का दावा निरस्त कर दिया गया।
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शासन की ओर से प्रकरण में अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने पैरवी की।

ग्रामीणों के आवागमन से जुड़ा था मामला
बिरमावल का यह विवाद केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि ग्रामीणों की आवाजाही और सार्वजनिक सुविधा से भी जुड़ा था। न्यायालय के निर्णय से सड़क निर्माण के विरुद्ध दायर बैंक के दावे का निस्तारण हुआ है। मामले ने यह भी रेखांकित किया कि भूमि संबंधी विवादों में सीमांकन, राजस्व नक्शे और दस्तावेजी साक्ष्य कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

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