प्रिय दर्शनी क्लब जावरा गरबा नृत्य ने एक साथ करवाए सभी देवी देवता के दर्शन।
आई दिखाते हैं नारद न्यूज़ गरबा महोत्सव का विशेष खबरें।

प्रिय दर्शिनी क्लब कमानी गेट जावरा पर विगत् 38 वर्षो से प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी नवरात्रि महोत्सव के सातवे दिन बालिकाओं द्वारा सभी त्यौहारों की थीम पर आकर्षक गरबों का प्रदर्शन किया गया जिसमें अंत में दिपावली का त्योहार भव्य आतिश बाजी के साथ मनाया गया।https://www.youtube.com/@naradhnews2424
गरबा में समावेश जावरा का कीर्तिमान उत्सव गरबा रास और डांडिया नवरात्रि के त्योहार में न सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक हैं, बल्कि यह हमें हमारी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का एक माध्यम भी हैं। यह नृत्य न सिर्फ हमें उत्साह और ऊर्जा से भर देता है, बल्कि यह हमें समाज में एकता और समर्पण का संदेश भी देता है। गरबा रास केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि एक अद्वितीय अनुभव है, जो नवरात्रि के पावन पर्व को और भी खास बना देता है।https://www.facebook.com/dolat.patidar
तो इस नवरात्रि, आइए माँ दुर्गा की आराधना करें, गरबा रास का आनंद के साथ और हमारी संस्कृति की इस अनमोल धरोहर को हृदय से अपनाएँ गई है 
गरबा रास का इतिहास और महत्व गरबा रास का संबंध माँ दुर्गा की आराधना से जुड़ा हुआ है। ‘गरबा’ शब्द ‘गर्भदीप’ से आया है, जो जीवन और सृजन का प्रतीक है। यह नृत्य माँ दुर्गा की शक्ति और सृजनशीलता का प्रतीक है, जिसे सर्व समाज के लोग सामूहिक रूप से नृत्य करके मनाते हैं। गरबा में महिलाएँ पारंपरिक लहंगा-चोली पहनती हैं,

डांडिया रास का नव निर्मित संगीतमय जादू के जैसी कांतिकारी गति से दर्शको का मन मोहक महिमा मे अपरम्पार माता की अलग अलग गुणों ओर अवतारों को संजोया गया है ।
गरबा के बाद, डांडिया रास भी नवरात्रि का अभिन्न हिस्सा है। यह नृत्य मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता है, लेकिन महिलाएँ भी इस नृत्य का हिस्सा बनती हैं। डांडिया नृत्य में लकड़ी की छड़ियों का उपयोग होता है, जिन्हें डांडिया कहा जाता है। यह छड़ियाँ माँ दुर्गा के महिषासुर पर विजय की प्रतीक हैं। डांडिया रास का संगीत उर्जावान और उत्साहपूर्ण होता है, जो माहौल को और भी जादुई बना देता है।
Author: Naradh News24
प्रधान संपादक


