रतलाम में मनाया छठ पूजा: महत्त्वपूर्ण हिन्दू पर्व का त्यौहार।

♦इस खबर को आगे शेयर जरूर करें ♦

👇 लिसन न्यूज़

रतलाम में मनाया छठ पूजा: महत्त्वपूर्ण हिन्दू पर्व का त्यौहार।कवलका माता, विनोबा नगर, हनुमान ताल सहित अन्य स्थानों पर मनाया गया छठ त्यौहार ।

छठ पूजा भारत के प्रमुख हिन्दू त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व सूर्यमाता और उनकी पत्नी उषा को समर्पित होता है और चार दिनों तक चलने वाला यह अनुष्ठान प्रकृति, सूर्य, और जल से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को दर्शाता है।https://www.youtube.com/@naradhnews2424

छठ पूजा का इतिहास बहुत पुराना है और इसे वैदिक काल से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि यह पूजा सूर्य देव की उपासना के रूप में शुरू हुई, जिनके आशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। छठ पूजा विशेष रूप से उन लोगों द्वारा की जाती है जो किसी खास उद्देश्य या मन्नत के साथ सूर्य देव से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।

 

छठ पूजा के दिन और उनका महत्व छठ पूजा आमतौर पर चार दिन मनाई जाती है:

 

पहला दिन – व्रती गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान करके शुद्ध होते हैं और फिर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। यह दिन घर की सफाई और तैयारियों का होता है, ताकि पूजा का वातावरण शुद्ध और पवित्र रहे।

 

दूसरा दिन – व्रति दिन भर उपवासी रहते हैं और शाम को खीर, रोटी, गुड़, और फल का भोजन करते हैं। इस दिन को ‘खरना’ कहा जाता है, और यह दिन व्रति की उपासना और सूर्य देव के प्रति आस्था का प्रतीक है।

तीसरा दिन – संतान ग्रहण , व्रति सूर्यास्त के समय नदी या तालाब के किनारे जाते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य (अर्पण) देते हैं। इस दिन का महत्व यह है कि सूर्यास्त के समय विशेष रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।https://www.facebook.com/dolat.patidar

 

चौथा दिन – उषा अर्घ्य (Usha Arghya): चौथे दिन, व्रति सूर्योदय से पहले नदी या तालाब के किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दिन सूर्योदय के साथ साथ व्रति का उपवास भी समाप्त होता है। यह दिन खास तौर पर सूर्य देव की कृपा प्राप्ति का दिन माना जाता है।

छठ पूजा का महत्व

 

सूर्य की पूजा: सूर्य देव को जीवनदाता माना जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा करके लोग उनसे स्वास्थ्य, समृद्धि, और सुख-शांति की कामना करते हैं।

 

परिवार और समाज में एकता: यह पूजा परिवार और समाज को एकजुट करने का एक साधन है, क्योंकि पूरे गांव या शहर के लोग एक साथ पूजा में भाग लेते हैं।

 

छठ पूजा के दौरान सूर्य देव की उपासना से शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूती प्राप्त होती है।

छठ पूजा का पर्यावरणीय दृष्टिकोण

छठ पूजा में जल स्रोतों की पूजा होती है, जो पर्यावरण को संरक्षित करने का संदेश देती है। इस पूजा के माध्यम से लोग प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझते हैं और उनके संरक्षण का संकल्प लेते हैं।

 

छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक पर्व है जो जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह पर्व न केवल सूर्य देव की उपासना करता है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता, स्वास्थ्य और सामाजिक सौहार्द्र को भी बढ़ावा देता है। इस पर्व के दौरान की जाने वाली कठिन तपस्या और व्रत आत्मनिर्भरता, संयम और संतुलन की प्रतीक हैं।

 

छठ पूजा से जुड़े रीति-रिवाज और परंपराएं समाज को एकजुट करती हैं और भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों को बनाए रखती हैं।

Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram
LinkedIn
Email
Print

Leave a Comment

Live cricket updates

Radio

Stock Market Updates

Weather




error: Content is protected !!