फर्जी दस्तावेज से हाउसिंग बोर्ड मकान की रजिस्ट्री, महिला को 7-7 साल की सजा
मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी, नामांतरण फर्जी — कोर्ट का कड़ा फैसला
रतलाम में मकान घोटाला: 10 साल पुराने केस में सफर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से हाउसिंग बोर्ड मकान की फर्जी रजिस्ट्री — महिला को 7-7 वर्ष की सजा
▶️ न्यायालय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
रतलाम। दीनदयाल नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड के मकान के फर्जी नामांतरण और रजिस्ट्री के बहुचर्चित मामले में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने आरोपीया लालीबाई पति रामाजी भील (65) निवासी संदला को विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए कठोर सजा सुनाई है।
न्यायालय ने आरोपी को —
धारा 419 भादवि में 3 वर्ष कारावास
धारा 467 एवं 468 भादवि में 7-7 वर्ष कारावास
धारा 471 भादवि में 2 वर्ष कारावास
की सजा सुनाई है।
▶️ क्या है पूरा मामला?
प्रकरण में पैरवीकर्ता अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार के अनुसार दिनांक 27 जनवरी 2016 को फरियादी राजशेखर पिता घनश्याम निवासी चित्तौड़गढ़ ने थाना दीनदयाल नगर, रतलाम में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया था।
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आवेदन में बताया गया कि दीनदयाल नगर (अमृत सागर) रतलाम स्थित मकान क्रमांक डी-232 वर्ष 1992-93 में उनकी नानी कमलाबाई पति मोतीलाल उपाध्याय (जाति ब्राह्मण) ने हाउसिंग बोर्ड से क्रय किया था।
वर्ष 2006 में कमलाबाई की मृत्यु के बाद उक्त मकान पर उनकी माता रतनबाई पुरोहित का कब्जा था।
▶️ फर्जी दस्तावेजों से रचा गया षड्यंत्र
आरोप के अनुसार —
लालीबाई ने स्वयं को कमलाबाई की पुत्री बताते हुए
फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाया
फर्जी शपथ पत्र पेश किया
फर्जी वोटर आईडी लगाई
फर्जी पते दर्ज कराए
फर्जी गवाह प्रस्तुत किए
जांच में पाया गया कि मृत्यु प्रमाण पत्र में दर्ज नंबर पर नगर निगम में जमीलउद्दीन पिता कमरुद्दीन निवासी मिल्लत नगर का नाम दर्ज था।
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दस्तावेजों में अलग-अलग नाम (लालीबाई पति रामजी राठौर, तेली) एवं फर्जी पते दर्ज पाए गए। फोटो भी फर्जी पाया गया।
इन कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में नामांतरण कराया गया।
▶️ नियमों की अनदेखी, दो माह में बेच दिया मकान
नामांतरण के मात्र दो माह बाद 10 सितंबर 2015 को आरोपी लालीबाई ने उक्त मकान कमलेश पिता कैलाश पाटीदार, ग्राम मांगरोल को 6 लाख 11 हजार रुपये में विक्रय कर दिया।
जबकि हाउसिंग बोर्ड के नियम अनुसार नामांतरण के एक वर्ष तक मकान का विक्रय नहीं किया जा सकता।
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▶️ पुलिस कार्रवाई
फरियादी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर थाना डीडी नगर में लालीबाई सहित हाउसिंग बोर्ड कर्मचारियों एवं दलालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई।
जांच पूर्ण होने के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
▶️ समझौता भी हुआ, पर सजा बरकरार
सुनवाई के दौरान 23 जुलाई 2024 को फरियादी राजशेखर एवं उनकी माता ने न्यायालय में आरोपी के पक्ष में लिखित समझौता प्रस्तुत किया था, किंतु गंभीर धाराओं को दृष्टिगत रखते हुए न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर निर्णय सुनाया। इस खबर को देखने के लिए 👇 👇
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▶️ किन्हें मिली राहत?
न्यायालय ने आरोपीगण —
अशोक दय्या, रमेश शर्मा, नानालाल एवं गोपाल को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
🟡 हाईलाइट बॉक्स (प्रिंट के लिए)
🔹 फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से मकान नामांतरण
🔹 फर्जी वोटर आईडी व पते का इस्तेमाल
🔹 नामांतरण के 2 माह बाद 6.11 लाख में विक्रय
🔹 7-7 वर्ष तक की सजा
🔹 सह आरोपी दोषमुक्तजा
Author: Naradh News24
प्रधान संपादक


