मुख्य खबर:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब हमारी रसोई तक पहुंच गया है! एक भारतीय स्टार्टअप ‘स्कैनएक्स’ ने एक ऐसी पोर्टेबल डिवाइस विकसित की है जो सिर्फ 90 सेकंड में फल और सब्जियों में मौजूद कीटनाशकों का पता लगा सकती है। यह तकनीक न केवल हमारे भोजन को सुरक्षित बनाने में मदद करेगी, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए गेम चेंजर साबित होगी।
कैसे काम करती है यह जादुई डिवाइस?
यह डिवाइस निकट इन्फ्रारेड (NIR) और मध्य इन्फ्रारेड (MIR) स्पेक्ट्रोस्कोपी को AI और मशीन लर्निंग के साथ जोड़कर काम करती है। यह फल या सब्जी के छोटे से टुकड़े को स्कैन करके उसमें मौजूद कीटनाशकों के अवशेष, केमिकल के प्रकार और उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी देती है। सबसे खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी केमिकल के, सुरक्षित और बिना नुकसान पहुंचाए की जाती है।
स्कैनएक्स के संस्थापक रजतवर्धन के अनुसार, यह डिवाइस 2026 के अंत तक बाजार में आने की उम्मीद है। शुरुआती परीक्षणों में इसके शानदार नतीजे सामने आए हैं। एक जांच की लागत मात्र 10 से 15 पैसे रहने की उम्मीद है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में होगी। एक डिवाइस कम से कम पांच साल तक काम कर सकती है और इसमें बदली जा सकने वाली बैटरी भी होगी।
क्यों है यह तकनीक इतनी महत्वपूर्ण?
आजकल फलों और सब्जियों में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग एक बड़ी चिंता का विषय है, जिससे कैंसर और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पारंपरिक लैब जांच महंगी और समय लेने वाली होती है, जो आम लोगों के लिए संभव नहीं। यह AI-आधारित डिवाइस इस समस्या का एक किफायती और त्वरित समाधान प्रदान करती है।
किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद:
• किसानों के लिए: जैविक खेती करने वाले किसान अब अपने उत्पादों की गुणवत्ता आसानी से साबित कर सकेंगे और बेहतर दाम पा सकेंगे।
• उपभोक्ताओं के लिए: घर बैठे तेज और सटीक जांच के जरिए उपभोक्ता सुरक्षित भोजन प्राप्त कर सकेंगे और खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।
यह तकनीक आईआईटी में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ‘स्कैनएक्स’ द्वारा विकसित की गई है, जो भारत में नवाचार और खाद्य सुरक्षा की दिशा
में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Author: Naradh News24
प्रधान संपादक


