कच्चे धागे का मज़बूत प्रेम रक्षा बंधन, महत्व व _ मुहूर्त

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19 अगस्त दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से शाम 6 बजकर 25 मिनट तक बांधी जाएगी राखी।

 

स्नेह और प्रेम के कच्चे धागे का मज़बूत प्रेम रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार वर्ष 2024 Date:  19 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा.।

रक्षाबंधन के दिन बहनें  अपने भाई की कलाई पर स्नेह और प्रेम का सूत्र बांधती हैं और साथ ही उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. इसके बदले में भाई उन्हें रक्षा का वचन देते हैं. भारत में राखी के पवित्र पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. ।

इसे रिश्तों में मधुर मिठास, विश्वास और प्रेम बढ़ाने वाला पर्व माना गया है. इसे हर साल सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है.श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर प्रेम और स्नेह का रक्षासूत्र बांधती हैं. साथ ही बहनें अपनी भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना भी करती हैं और भाई बदले में अपनी प्यारी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं. ।

रक्षाबंधन का त्योहार इस बार 19 अगस्त 2024, सोमवार के दिन मनाया जाएगा. जानकारों की मानें तो,Raksha Bandhan 2024 Date, Time: पिछले साल की तरह ही इस साल भी रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा रहेगी। https://www.youtube.com/@naradhnews2424

अनुचित समय में राखी नहीं बांधनी चाहिए. 

बता दें कि भद्रा के समय राखी नहीं बांधी जाती है। वहीं, हिंदू धर्म पंचांग के अनुसार, रविवार 18 अगस्त की रात 2 बजकर 21 मिनट से लेकर सोमवार 19 अगस्त की दोपहर में 1 बजकर 24 मिनट तक भद्रा रहेगी  इस कारण ,राखी 19 अगस्त दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से शाम 6 बजकर 25 मिनट तक बांधी जाएगी। 

इसके अलावा गायत्री जयंती, नारली पूर्णिमा, संस्कृत दिवस और हयग्रीव जयन्ती भी इसी दिन मनाई जाती है। खास बात ये है कि इस शुभ दिन पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं। ये योग हैं सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग। ये दोनों ही योग काफी शुभ परिणाम देते हैं।

कैसे शुरू हुई राखी बांधने की प्रथा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधने की प्रथा महाभारत काल से चली आ रही है। कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से कट गई थी। तब उनकी उंगली से खून बहता देख द्रौपदी ने बिना सोचे अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण की चोट पर बांधा था। उस समय भगवान ने हर समय द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया था और अपना ये वचन निभाया भी। श्री कृष्ण ने हस्तिनापुर के शाही दरबार में द्रौपदी को सार्वजनिक अपमानित होने से बचाया था। तभी से बहनें अपने भाई,

 की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई कृष्ण भगवान की तरह उनकी हर स्थिति में रक्षा करने का वचन देते हैं।

Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

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