भारतीय संतों के आश्रम पर शिष्यों और भक्तों का विशाल जन सैलाब उमड़ा।

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पंचेड आश्रम में गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा भक्तों का जन सैलाब ।

नामली धामनोद मुख्य मार्ग पर स्थित संत श्री आशाराम जी बापू आश्रम  पंचेड पर इस बार गुरु पूर्णिमा के निमित्त गुरु भक्तों का तांता लग गया। विश्वास मौसम की अनुकूलता एवम् रविवार होने के कारण आश्रम पर भक्तों का आना प्रातः 6 बजे से शुरू हो गया था जो देर रात तक अनवरत जारी रहा। सर्व प्रथम वेद मंत्रोच्चार से पादुका पूजन के साथ कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। जिसमें कई हजार की संख्या में उपस्थित भक्तों ने भजन कीर्तन द्वारा सभी को भाव विभोर कर दिया। तत्पश्चात विशाल पादुका यात्रा का आयोजन आश्रम परिसर में किया गया जिसमे भाव से सभी ने नृत्य करते हुए जीवन को धन्य किया। दोपहर के समय आश्रम में भक्तों की भारी भीड़ के कारण  कदम रखने की जगह नहीं थी। आरती के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया एवं सभी को प्रसाद का वितरण भी किया गया। आश्रम के श्री प्रवीण भाई ने बताया कि इस वर्ष सुबह से शाम तक लगभग 20,000 से अधिक गुरु भक्त पधारे।

आश्रम में भक्तों द्वारा अपने प्यारे गुरूदेव के उत्तम स्वास्थ्य  हेतु  जप, सामूहिक प्रार्थना हवन  आदि सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित किए। 

 रविवार को पूरे देश में गुरु पूर्णिमा मनाया जा रहा है. इस अवसर पर संतों के आश्रम पर शिष्यों और भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. गुरु पूर्णिमा का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व होता है. गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु शिष्य को दीक्षा प्रदान करते हैं.रविवार को धार्मिक स्थल और संतों के आश्रमों पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव आस्था पूर्वक मनाया गया ।https://www.youtube.com/@naradhnews2424

सर्वार्थ सिद्ध योग में सनातन संस्कृति के अनुयायियों द्वारा गुरु पूर्णिमा के साथ वेदव्यास जयंती भी मनाई जा रही है. सुबह से गुरुओं के निवास पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. संत महात्माओं की ओर से शिष्यों को दीक्षा देकर आशीर्वाद प्रदान किया जा रहा हैं ।

संसार रूपी भवसागर से शिष्यों को पार करने का सुगम साधन गुरु ही बता सकता है. गुरु के माध्यम से ही मनुष्य आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति कर सकता है. गुरु शिष्य के हित में सब कुछ न्योछावर कर सकता है. ।

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान से साक्षात कराने का गुरु के पास ही सुगम साधन है.

गुरू बिन भव निधि तरहिं न कोई, जो विरंचि संकर सम होई :महाकवि तुलसीदास ने महान ग्रंथ रामचरितमानस में गुरु की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला गया है। तुलसीदास ने रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में लिखा है- गुरु बिन भव निधि तरहिं न कोई, जो विरंचि संकर सम होई, अर्थात गुरु के बिना संसार रूपी भवसागर से कोई भी तार नहीं सकता है. ब्रह्मा और भगवान शंकर को भी गुरु बनाने पड़े हैं. इसके अलावा अन्य धार्मिक ग्रंथो में गुरु की उपमा साक्षात ब्रह्म से दी है.जिले के धार्मिक स्थल हनुमान घड़ी आश्रम समेत सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है. महिला और पुरुष भारी तादाद में संत महंतों के स्थानों पर दीक्षा लेने पहुंच रहे हैं. गुरूओं की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया ।

. गुरुओं द्वारा शिष्यों को जप करने के लिए मंत्र दिया जप तप कर  गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया।

भंडारे लगाकर भोग प्रसादी भी श्रद्धालुओं को महा प्रसाद वितरित की गई। 

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