श्री कमल किशोर नागर भागवत कथा स्थल पर मीडिया द्वारा फ़ोटो वीडियो क्लिप पर प्रतिबंध

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👇 लिसन न्यूज़

        ✒️✒️ मीडिया बन्धु संदेश✒️  सोशल: प्रिंट: इलेक्ट्रिक मीडिया  बंधुओं को कथा पांडाल में कथा वाचक गुरु देव के फ़ोटो वीडियो क्लिप से किया इंकार।

बढ़ते डिजिटल युग के सहारे चलते स्वयं के धर्म कर्म प्रचार प्रसार पर रोक,।

(आख़िर क्या है रास प्रतिबंध का कारण चिंगारी लेगी बड़ा रूप ।)

(कथा को यूट्यूब चैनल पर देखने k लिए ????लिंक पर क्लिक करें। लाईक और सस्क्राइव जरूर करें । ताकि  अच्छी बुरी ख़बर छुटे नहीं।)____, 

https://www.youtube.com/@naradhnews2424

श्री मद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ स्थान रतलाम मंदसौर जावरा हिंगलाज माता मंदिर मेन रोड स्थित आयोजक परिवार रामचंद्र जी राठौर परिवार के कर कमलों द्वारा संत श्री कमल किशोर जी नागर गौ सेवा भक्त ने परमार्थ धर्मपथ के हजारों लोगों को ज्ञान यज्ञ स्थान पर हिन्दू धर्म पथ गामी को संशय और संदेह मुक्त कथा का रसपान कराया गया।
मालवांचल की भाषा समझाते हुए नागर जी ने कहा आज के इस जमाने सिर्फ एक दूसरे से जलते हैं चाहे कोई सांसारिक कर्म क्षेत्र हो या प्रयाग राज के साधु संत।
मन की दुर्भावना मे सत्ता तथा उपाधियों की गादी की लालसा के लिए सभी दूर बड़ी जंग छिड़ी हुई है।
एक समय था गुरु के पांव दबाकर संत बन गए अब परिवर्तन के दौर में आज प्रयाग मे पाखंडी गुरु का गला दबा कर महंत बन गए।
किसी का व्यक्तिगत रूप से बुराई नहीं करते पर यह सच छुप नहीं सकता।
इंसान की दस इन्द्रियों आंख कान मुंह आदि खा गई शरीर सारा, यह इंद्रिय दोष, भजन के माध्यम से जग इंद्रिय खा गई सारा हीरा मोती का मुकुट निकल गई, सब कोई खा गई ये इंद्रिय डायन ।
खा गई लोगन खा गई लुगाइन,। इंद्रिय दोष के चलते लंगोटी वाले साधु भी माया से वंचित नहीं जो बची है सिर्फ़ आत्मा अकेली रह गई।
यहां गलतियां तो सब इंसान से होती हैं पर दूसरी बार फिर ग़लती नहीं करना।
नागर जी उदाहरण देते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि जब राम ज्ञान सुना रहे थे तब सीता को सोने का हिरन दिख रहा था । यह भी इंद्रिय दोष है राम भी शिकारी नहीं पर यह सिर्फ माया थी।
नागर जी ने कहा महाकुंभ प्रयाग राज से एक बात जो सर्वश्रेष्ठ निकल कर आई वह श्रोताओं को बताया कि गुरु नाम दान देने मे सभी साधु संत में होड़ मची हुई है। एक बाद दूसरा और तीसरे गुरु चल रही प्रथा की चेन मे सर्व हिन्दू धर्म सनातनी गुरुओं ने निर्णय लिया है कि नाम दान नहीं ले तो चलेगा सिर्फ एक बार एक आसन पर बैठ भागवत गीता कथा श्रवण करने के बाद किसी का नाम दान नहीं लेंगे तो पुण्य प्रतापी लाभ वहीं हासिल हो जाता हैं गीता ज्ञान को सर्वश्रेष्ठ माना हैं।जो गुरु दीक्षा ले कर भगवान का जाप करते हैं वहीं फल भागवत कथा सुनने से प्राप्त हो जाता हैं।
भगवान का राम का नाम सर्वी परी है, जो मौत घाट तक अच्छे बुरे सब जगह चलता है इस में कोई संशय और रोक नहीं है।
इस पावन अवसर पर संत श्री कमल किशोर जी नागर ने हजारों धर्मप्रेमियों को कथा के माध्यम से जीवन में धर्म और परमार्थ का महत्व समझाया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि समाज में एकता और आध्यात्मिकता का संदेश देने वाला था ।
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