उज्जैन लोकायुक्त की कार्रवाई से खुला राजस्व विभाग में फिर भ्रष्टाचार का मामला ।

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👇 लिसन न्यूज़

रतलाम ग्रामीण तहसील, मध्यप्रदेश
तिथि: 3 जून 2025 ।
जांच व कार्यवाही: उज्जैन लोकायुक्त टीम रतलाम में हुआ रिश्वत का मामला उजागर।
🔹 रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा गया पटवारी:
रतलाम ग्रामीण तहसील कार्यालय में पदस्थ पटवारी यशवर्धन शर्मा को 8,000 रुपये की रिश्वत लेते समय लोकायुक्त टीम ने मीटिंग हॉल में रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
🔹 कुल 25,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई थी:
एक बीघा ज़मीन के नक्शा बंटवारे के एवज में पटवारी ने शिकायतकर्ता से कुल ₹25,000 की मांग की थी। पहले ही ₹2,000 की राशि ले चुका था।
🔹 शिकायतकर्ता बना नकली ग्राहक:
शिकायतकर्ता जितेंद्र सिंह चावड़ा (निवासी रोज़ी) ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी, जिसके आधार पर पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। नकली ग्राहक बनकर शिकायतकर्ता ने पटवारी को पैसे दिए और लोकायुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
🔹 तहसीलदार तक पहुंचता है पैसा:
शिकायतकर्ता का दावा है कि पटवारी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यह रिश्वत की राशि तहसीलदार तक पहुंचाई जाती है। यह बयान राजस्व विभाग की गहरी सड़ी-गली व्यवस्था की ओर इशारा करता है।

🔹 FIR दर्ज, पूछताछ जारी:
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोपी पटवारी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उससे पूछताछ की जा रही है।
🔹 लोकायुक्त टीम की मुस्तैदी:
कार्यवाही में DSP राजेश पाठक, इंस्पेक्टर दीपक शेजवार, कांस्टेबल नील अटोलिया, इसरार खान और उमेश जाटव की सक्रिय भागीदारी रही।

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 मुख्य मंत्री मध्यप्रदेश सरकार के वर्तमान सुझाव के दौरान राजस्व विभाग के सभी जिलों में अन्याय के चलते पटवारी और आर आई के खिलाफ़ कार्यवाही पर चलते पदस्थ राजस्व विभाग के स्थानांतरण सुनिश्चित किए जाएंगे ।
 वर्तमान के चलते दौर में आज फ़िर बड़ा रिश्वत का मामला सामने आया तो क्या समझा जाए कि जनता के साथ अन्याय का घिनौना चेहरा कांच की तरह साफ दिखाई दे रहा है ।
यह मामला प्रदेश भर में फैले राजस्व विभाग के उस चेहर। ,,को उजागर करता है, जो गरीब और जरूरतमंद जनता को बुनियादी ज़मीनी कार्यों के लिए रिश्वत देने को मजबूर करता है। 
नक्शा, बंटवारा, नामांतरण जैसे सामान्य राजस्व कार्य अब आम आदमी के लिए एक आर्थिक बोझ और मानसिक यातना का कारण बनता जा रहा हैं।
 एक किसान ने अपने वक्तव्य में बताया कि यह न केवल एक पटवारी का मामला है, बल्कि पूरी व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार का संकेत है। तहसील स्तर से लेकर जिला और संभाग स्तर तक गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
लोकायुक्त की यह कार्यवाही एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अगर प्रशासन और शासन सच में आमजन की चिंता करता है, तो यह शुरुआत भर होनी
चाहिए – अंत नहीं।
Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

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