रतलाम में धूमधाम से मनाई गई बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म शताब्दी — जनजातीय नायक के जीवन व संघर्षों को किया गया नमन ।

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👇 लिसन न्यूज़

 

रतलाम, 9 जून 2025:

देश के महान जननायक, वीर सपूत धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर रतलाम जिले में विविध सांस्कृतिक, सामाजिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रमों के माध्यम से भव्य उत्सव का आयोजन किया गया। आदिवासी समुदाय सहित समस्त नागरिक समाज ने इस अवसर पर एकजुट होकर बिरसा मुंडा के त्याग, संघर्ष एवं सेवा भावना को नमन किया।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ:

 

कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात स्थानीय जनजातीय नृत्य समूहों द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए गए। इस आयोजन में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के योगदानों को रेखांकित किया:

 

> “बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे, जिन्होंने जनजातीय समाज को आत्मगौरव और संघर्ष का मंत्र दिया।”

टोबी  ट्यूब चैनल पर देखने के लिए दी गई लिंक पर टच करें 👇 👇

 

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बिरसा मुंडा: पराक्रम और सेवा भाव का प्रतीक

 

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को छोटा नागपुर क्षेत्र (अब झारखंड) में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंका। उनकी अगुवाई में चला “उलगुलान आंदोलन” (महाविद्रोह) अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों के खिलाफ एक जनक्रांति बन गया। उन्होंने न केवल राजनीतिक संघर्ष किया, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध भी आवाज़ उठाई।

बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज को आत्मसम्मान, शिक्षा, और आत्मनिर्भरता की दिशा में जागरूक किया। उन्होंने ‘धरती हमारी मां है’ के सिद्धांत पर आधारित भूमि अधिकारों की रक्षा की और अंग्रेजों की ज़मींदारी प्रथा को चुनौती दी।

 

रतलाम में आदिवासी समाज की श्रद्धांजलि ।

 

 

रतलाम जिले के विभिन्न जनजातीय अंचलों से आए प्रतिनिधियों और युवाओं ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। आयोजन स्थल पर बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी और आदिवासी शिल्पकला प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने युवाओं को उनके गौरवशाली अतीत से जोड़ा।

 

कार्यक्रम का समापन ‘धरती आबा’ के जयघोष और जनगीतों के साथ हुआ, जिसमें यह संकल्प लिया गया कि बिरसा मुंडा के विचारों को आने वाली पी

ढ़ियों तक पहुँचाया जाएगा।

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