मजबूर महिला के साथ दुष्कर्म करने वाले को विशेष अदालत ने सुनाई 10 वर्ष की सश्रम सजा ।

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44 सुनवाईयों के बाद मिला न्याय, कोर्ट का सख्त संदेश – अपराध चाहे जितना पुराना हो, सजा तय है

रतलाम जिले की विशेष सत्र न्यायाधीश श्रीमती बरखा दिनकर की अदालत ने 2019 में घटित महिला से दुष्कर्म के एक संगीन मामले में आरोपी लाल बिहारी (उम्र 34, निवासी ग्राम धौलपुर) को दोषी पाते हुए 10 वर्ष का सश्रम कारावास तथा जुर्माने की सजा सुनाई है।

न्यायालय का यह निर्णय न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश देता है कि कानून से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता, चाहे केस में कितनी भी सुनवाई क्यों न हो।

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🔍 घटना का संक्षिप्त विवरण:

दिनांक 26 मई 2019 को पीड़िता जब ठिकरिया से पैदल बाजना की ओर जा रही थी, तभी सूरज बड़ला रोड स्थित स्कूल के पास आरोपी लाल बिहारी ने मोटरसाइकिल पर महिला को घर छोड़ने का बहाना कर कानवा छावनी ले जाकर दुष्कर्म किया। पीड़िता के विरोध पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। बाद में महिला ने किसी तरह जान बचाकर परिजनों को पूरी घटना बताई और बाजना थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।

🧬 डीएनए रिपोर्ट से अपराध की पुष्टि:

पुलिस द्वारा की गई वैज्ञानिक जांच में डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई, जिससे आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट हो गई। 44 सुनवाईयों के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

 

⚖️ सुनाई गई सजा:

धारा 366 (अपहरण) – 8 वर्ष सश्रम कारावास + ₹500 जुर्माना

धारा 376(1) (दुष्कर्म) – 10 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना

धारा 506(भाग-2) (धमकी) – 3 वर्ष सश्रम कारावास + ₹500 जुर्माना 

👉 सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इस प्रकार कुल 10 वर्ष का सश्रम कारावास आरोपी को भुगतना होगा।

 

यह न्यायिक निर्णय पीड़ित महिलाओं को साहस और विश्वास देता है कि न्याय अवश्य मिलेगा, भले ही समय लगे।

अदालत का यह फैसला भविष्य के अपराधियों के लिए चेतावनी है कि महिलाओं के खिलाफ किया गया अपराध कठोर सजा का कारण बनेगा।

यह घटना स्त्री सम्मान और सुरक्षा के प्रति समाज की जिम्मेदारी का पुनः स्मरण कराती है।

विशेष लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी द्वारा सशक्त तर्क, साक्ष्य और न्याय की दिशा में की गई कार्यवाही सराहनीय रही।

🔔 न्यायालय का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणा और अपराधियों के लिए चेतावनी है। नारी का अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं।

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