**फोरलेन पर बाइक स्लिप, पटवारी की दर्दनाक मौत: बेटियों की शादी की पत्रिका बांटने निकले थे; खुशियों के बीच ग़म ने घर का द्वार खटखटा दिया**

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**फोरलेन पर बाइक स्लिप, पटवारी  की दर्दनाक मौत:बेटियों की शादी की पत्रिका बांटने निकले थे; खुशियों के बीच ग़म ने घर का द्वार खटखटा दिया**

रतलाम/सैलाना।

रतलाम ज़िले में एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। सैलाना के सकरावदा हल्का में पदस्थ पटवारी कमलेश राठौर (52) की फोरलेन पर बाइक स्लिप होने से मौत हो गई। वे अपनी दो बेटियों की शादी की 29 नवंबर को होने वाली शादी की पत्रिका बाँटने अपने रिश्तेदार के साथ निकले थे। लेकिन ठीक बारह दिन पहले ही परिवार को “साफ़ा” की जगह सफ़ेद “ कपड़ा” बाँधने की घड़ी आ गई।
कैसे हुआ हादसा
रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे, बिलपांक थाना क्षेत्र के सातरुंडा के पास फोरलेन पर उनकी बाइक स्लिप हो गई। बताया गया कि बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई, जिससे पटवारी राठौर के सिर में गंभीर चोट लग गई। उनके साथ गए रिश्तेदार के पैर में फ्रैक्चर हुआ है।
112 को सूचना मिलने पर 108 एंबुलेंस ने दोनों को रतलाम मेडिकल कॉलेज पहुँचाया। सिर में गम्भीर चोट के कारण रात में उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया। वहाँ से इंदौर रैफर किया गया, लेकिन बदनवर के पास ही रास्ते में उनका दम टूट गया। रात में शव वापस मेडिकल कॉलेज लाकर सुरक्षित रखा गया। सोमवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।
घर की खुशियाँ मातम में बदलीं
पटवारी संघ जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पाटीदार ने बताया कि राठौर पाँच बच्चों के पिता थे—चार बेटियाँ और एक छोटा बेटा। 29 नवंबर को उनकी दोनों बड़ी बेटियों की शादी थी और वे उसी की पत्रिका बाँटने धार की तरफ जा रहे थे, तभी यह दुखद हादसा हो गया। रिश्तेदार अभी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है
घर में रिश्तेदारों का आना–जाना शादी की तैयारी के लिए शुरू हो चुका था, लेकिन अब हर घरवाले की आँखों में आँसू हैं। परिवार की खुशियाँ पलभर में मातम में बदल गईं।
थाना प्रभारी का बयान
बिलपांक थाना प्रभारी अय्यूब खान ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में मामला बाइक स्लिप होकर गिरने का प्रतीत हो रहा है। घायल के बयान लिए जा रहे हैं और आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी चेक किए जा रहे हैं।
समय की बेरुख़ी… साफ़े की जगह पगड़ी
जिस घर में बारात का स्वागत करने के लिए साफ़े तैयार रखे थे, वहीँ अब उसी घर में ग़म की “पगड़ी” बाँधी जाएगी।

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जहाँ माँ–बाप को बेटी की डोली विदा करने की तैयारी करनी थी, वहाँ नियति ने पिता की ही अर्थी को कंधा देने की मजबूरी खड़ी कर दी।
समय का भरोसा नहीं…
खुशी और दुख की रेखा कभी–कभी इतनी पतली होती है कि एक पल में जीवन बदल जाता है।
परिवार का रो–रोकर हाल बेहाल है — रिश्तेदारों, ग्रामीणों और सहकर्मियों में शोक की लहर है।
Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

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