प्रेमिका की नृशंस हत्या: कुंडालपाड़ा जंगल हत्याकांड में आरोपी नारायण को आजीवन कारावास

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प्रेमिका की नृशंस हत्या: कुंडालपाड़ा जंगल हत्याकांड में आरोपी नारायण को आजीवन कारावासहाईलाइट (Breaking / Highlights Points)

राजस्थान बॉर्डर के पास कुंडालपाड़ा (बोरदा) जंगल का बहुचर्चित हत्याकांड

प्रेमिका का चेहरा पत्थर से कुचलकर हत्या करने का मामला

तृतीय सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर ने सुनाया फैसला

आरोपी नारायण को धारा 302 में आजीवन कारावास

सबूतों से 49 बार मोबाइल बातचीत और लोकेशन ट्रैक साबित।

सहमति के आधार पर धारा 376 से दोषमुक्त

डीएनए रिपोर्ट से हत्या की पुष्टि

📰 ख़बर (विस्तृत समाचार रिपोर्ट)

रतलाम | नारद न्यूज़ 24

राजस्थान बॉर्डर के पास सरवन थाना क्षेत्र के ग्राम कुंडालपाड़ा (बोरदा) के जंगल में प्रेमिका की निर्मम हत्या के बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। तृतीय सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर ने अभियुक्त 25 वर्षीय नारायण पिता उदिया, निवासी ग्राम कुंडालपाड़ा (बोरदा) को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी को धारा 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत तीन वर्ष के कारावास एवं एक हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया।

🔍 मामले का घटनाक्रम

अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी ने बताया कि 23 अक्टूबर 2021 को सुबह करीब 9 बजे राजस्थान बॉर्डर के समीप कुंडालपाड़ा जंगल में एक अज्ञात महिला का शव मिला था, जिसका चेहरा पत्थर से कुचला हुआ था। शव की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मृतका के परिजनों ने कपड़ों के आधार पर पहचान की। मृतका बांसवाड़ा (राजस्थान) जिले की निवासी थी।

पुलिस जांच में सामने आया कि मृतका और आरोपी नारायण के बीच प्रेम संबंध थे। 22 अक्टूबर 2021 की शाम नारायण ने मृतका को फोन कर ग्राम घोड़ी तेजपुर बुलाया। वहां से दोनों बाइक पर दानपुर होते हुए कुंडालपाड़ा जंगल पहुंचे।

⚠️ झगड़े के बाद की गई हत्या

जंगल में बातचीत के दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। इसके बाद मृतका ने नारायण के साथ रहने की जिद की। नारायण ने शादीशुदा होने का हवाला देकर मना किया, जिससे विवाद हुआ। झगड़े के दौरान नारायण ने पास पड़े पत्थर से मृतका के सिर पर हमला कर उसकी हत्या कर दी और पहचान छिपाने के उद्देश्य से चेहरा कुचल दिया।

 

📱 तकनीकी साक्ष्य बने मजबूत आधार

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अभियोजन ने यह सिद्ध किया कि घटना से पहले आरोपी और मृतका के बीच 49 बार मोबाइल पर बातचीत हुई थी। सीडीआर रिपोर्ट में घटना दिनांक को दोनों की लोकेशन घोड़ी तेजपुर और दानपुर क्षेत्र में पाई गई। डीएनए रिपोर्ट में आरोपी और मृतका के कपड़ों पर समान रक्त पाया गया।

⚖️ न्यायालय का निर्णय

न्यायालय ने मृतका को बालिग मानते हुए सहमति की अवधारणा के आधार पर आरोपी को धारा 376 से दोषमुक्त किया, लेकिन हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप पूर्ण रूप से सिद्ध पाए गए।

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इस प्रकरण में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी द्वारा की गई।

Naradh News24
Author: Naradh News24

प्रधान संपादक

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